टिहरी, 10 अक्टूबर 20261 THDC इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोपावर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (THDC-IHET), टिहरी में ‘पहाड़ी क्षेत्रों के लिए सतत इलेक्ट्रिक वाहन’ विषय पर आयोजित एक सप्ताह के AICTE-ATAL वितपोषित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का शनिवार को समापन हुआ। छह दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के प्रतिभागियों ने उद्योग एवं शिक्षाविदों के विशेषज्ञों से इलेक्ट्रिक वाहन प्रौद्योगिकी, नवाचार तथा पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त परिवहन समाधानों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन (ICE) आधारित स्कूटी को हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन में परिवर्तित करने का व्यावहारिक प्रयोग रहा। प्रतिभागियों ने ऐसा वाहन विकसित किया, जिसे आवश्यकता के अनुसार पारंपरिक इंजन एवं इलेक्ट्रिक मोड में संचालित किया जा सकता है। इस प्रयोग ने पहाड़ी क्षेत्रों की विशिष्ट परिवहन आवश्यकताओं के अनुरूप हाइब्रिड तकनीक की संभावनाओं को प्रदर्शित किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों ने देहरादून स्थित CSIR-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (CSIR-IIP) की इलेक्ट्रिक वाहन संबंधी प्रयोगशाला का भ्रमण भी किया। इस दौरान उन्होंने उन्नत व्हीकल ड्राइव साइकिल टेस्टिंग लैब तथा इलेक्ट्रिक वाहन प्रयोगशाला का अवलोकन कर आधुनिक वाहन परीक्षण तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
समापन समारोह में संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) शरद कुमार प्रधान ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए समन्वयकों प्रो. नितिन कुमार गुप्ता एवं प्रो. हिमांशु गुप्ता को बधाई दी। उन्होंने प्रतिभागियों एवं शोधकर्ताओं से कार्यक्रम के दौरान अर्जित ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने में करने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों की परिवहन संबंधी चुनौतियों के समाधान हेतु समाजोपयोगी एवं पर्यावरण-अनुकूल तकनीकी समाधान विकसित करने पर बल दिया।
कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. नितिन कुमार गुप्ता एवं प्रो. हिमांशु गुप्ता ने उद्योग एवं शिक्षाविदों से जुड़े सभी विशेषज्ञों, संस्थान के सहयोगियों तथा विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम शिक्षण, अनुसंधान और उद्योग के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ उभरती प्रौद्योगिकियों में व्यावहारिक दक्षता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह कार्यक्रम इलेक्ट्रिक वाहन प्रौद्योगिकी में क्षमता निर्माण, व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा पहाड़ी क्षेत्रों के लिए सतत एवं ऊर्जा-कुशल परिवहन समाधानों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

