संसद के मानसून सत्र के पहले दिन पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (सपा) ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. सपा सांसद डिंपल यादव के नेतृत्व में पार्टी के सांसदों ने संसद भवन से जंतर-मंतर तक पैदल मार्च निकाला. प्रदर्शन के दौरान सरकार पर छात्रों की समस्याओं की अनदेखी करने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं करने का आरोप लगाया गया. सपा ने यह भी दावा किया कि मार्च के दौरान पुलिस ने डिंपल यादव समेत कई सांसदों को हिरासत में लिया. प्रदर्शन के दौरान डिंपल यादव ने कहा कि देश का युवा अपनी बात रखना चाहता है, लेकिन सरकार न तो उनकी बात सुन रही है और न ही संवाद करने को तैयार है. उन्होंने कहा कि छात्र लगातार अपनी समस्याएं उठा रहे हैं, फिर भी सरकार का रवैया असंवेदनशील बना हुआ है. उनके मुताबिक परीक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों का सबसे बड़ा नुकसान युवाओं और छात्रों को उठाना पड़ रहा है, जिससे वे मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को छात्रों और युवाओं की आवाज सुननी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से उठ रहे सवालों को दबाने की कोशिश की जा रही है. अखिलेश ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को गंभीरता और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए. समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सांसदों को हिरासत में लिया और छात्रों के साथ सख्ती बरती. पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी युवाओं, छात्रों, रोजगार और परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर अपनी राजनीतिक रणनीति मजबूत करने में जुटी है. संसद से सड़क तक हुए इस प्रदर्शन को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
